कब्ज या पूरी तरह से मल त्याग में रुकावट के कारण कई समस्याएं हो सकती हैं.
जब पाचन तंत्र खराब हो जाता है तो गुदा पर दबाव पड़ता है, जिससे बवासीर और गुदा टिशूज में दरारें जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यह समस्या विशेषकर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में आम है.
अक्सर गंभीर मामलों में, गुदा पर अत्यधिक दबाव के कारण होने वाली कब्ज से रक्त के थक्के बन सकते हैं. जिससे दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. ऐसी स्थिति में, भविष्य की जटिलताओं से बचने के लिए कब्ज का तुरंत इलाज करना महत्वपूर्ण है.
जब आंतें एक सप्ताह या उससे अधिक समय तक साफ नहीं होतीं तो उसे क्रोनिक कब्ज कहा जाता है. इसके लक्षणों में पेट फूलना, पेट में दर्द, मल त्याग के दौरान तनाव और मल का पूरी तरह से त्याग नहीं शामिल है.
अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो अत्यधिक दबाव से गुदा टिशूज को नुकसान पहुंच सकता है. जिससे बवासीर और फिशर जैसी समस्याएं पैदा होती हैं. इनसे काफी दर्द होता है.
हमने इस विषय में अधिक जानकारी के लिए अन्य डॉक्टरों से भी बात की.
मुंबई के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के जनरल सर्जन डॉ. लकिन वीरा ने कहा, “क्रोनिक कब्ज के कारण हैं, खाने में फाइबर की कमी, व्यायाम की कमी, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, या फिर गर्भावस्था और उम्र बढ़ने के दौरान आंतों में रुकावट है.”
उन्होंने बताया, “क्रोनिक कब्ज के कारण गुदा की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे सूजन और बवासीर हो जाती है. लगातार तनाव के कारण रोगी के गुदा में अल्सर या घाव भी हो सकता है. ये अल्सर गुदा के अंदर और बाहर दोनों जगह हो सकते हैं.”
“यदि स्थिति अधिक गंभीर हो जाए तो इससे ब्लड निकल सकता है और दर्द भी हो सकता है.”
डॉ. वीरा कहती हैं, “45-65 वर्ष की आयु के लगभग 20 प्रतिशत लोग कब्ज की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती होते हैं. हर दिन, 10 में से 2 लोग कब्ज से पीड़ित होते हैं, जिससे गुदा पर दबाव पड़ता है और बवासीर और फिशर का खतरा बढ़ जाता है. मरीजों को मल को नरम करने वाली दवाएँ लेने की भी सलाह दी जाती है, साथ ही उन्हें बवासीर और फिशर के बीच के संबंध के बारे में भी बताया जाता है.”
मुंबई के जिनोवा शाल्बी अस्पताल के जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. हेमंत पटेल ने कहा कि इस समय हमारे पास आने वाले अधिकांश मरीज़ कब्ज से पीड़ित हैं.
उन्होंने कहा कि 45 से 65 वर्ष की आयु के लगभग 15 प्रतिशत लोगों को प्रतिदिन कब्ज, पेट फूलना और पेट दर्द की शिकायत रहती है.
डॉ. पटेल के अनुसार, “कब्ज का समय पर उपचार करने से बवासीर और फिशर जैसी समस्याओं को रोका जा सकता है.”
“केला, सेब, चिया सीड्स, गाजर और चुकंदर सहित फाइबर से भरपूर आहार, नियमित शारीरिक गतिविधियां और भरपूर पानी पीने से आंतों के काम करने में सुधार होता है.”
वे कहते हैं, “मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर ना लगाएं और आंतों के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अपने आहार में प्रोबायोटिक्स को शामिल करें.”
“समय पर उपचार से बड़ी समस्याओं को रोका जा सकता है. साथ ही बवासीर और गुदा टिशूज जैसी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है.”
अगर आप अपनी जीवनशैली में कोई महत्वपूर्ण बदलाव करना चाहते हैं, अपने खाने को बदलना चाहते हैं, या शारीरिक व्यायाम शुरू करना चाहते हैं, तो डॉक्टर और विशेषज्ञ की मदद लेना महत्वपूर्ण है.
सबसे अच्छा यह है कि आप अपने शरीर और लक्षणों की डॉक्टर से उचित जांच करवाएं और उनकी सलाह के आधार पर लाइफस्टाइल में बदलाव करें.